उसका पछतावा, उसका राज

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अध्याय 119 वह लिया है

"बगावत! ये तो खुली बगावत है!" मीरा ने ग़ुस्से में अपने पास रखा पानी का गिलास झटके से उठाकर फ़र्श पर दे मारा।

काँच के चकनाचूर होने की तीखी आवाज़ कमरे में चुभ गई।

"वो हरामज़ादा, उस कमीनी की वजह से मेरे साथ इतना बुरा सलूक कर रहा है।"

उसी पल ज़ोई बहुत संभलकर अंदर आई।

फ़र्श पर बिखरे काँच के टुकड़े और...

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